हार्वर्ड कॉलेज ने अपने विवादास्पद ग्रेडिंग सुधार को लागू करने की तारीख आगे बढ़ाकर 2027 कर दी है। इस दौरान, एक नए ‘SAT+’ ग्रेड का प्रस्ताव रखा गया है।
यह नया ग्रेड उन छात्रों के लिए होगा जो पास/फेल विकल्प चुनते हैं, लेकिन असाधारण प्रदर्शन करते हैं। इसका मतलब है कि पारंपरिक अंक प्रणाली के बाहर भी श्रेष्ठता को मान्यता मिल सकेगी।
क्या बदलाव होंगे?
संशोधित योजना के तहत, ‘ए’ ग्रेड पर लगी सीमा अब सभी स्नातक छात्रों पर लागू होगी, चाहे वे पास/फेल का विकल्प ही क्यों न चुनें। इसका उद्देश्य ग्रेड इन्फ्लेशन (अंकों की मुद्रास्फीति) पर अंकुश लगाना है, जहां पिछले दशकों में उच्च ग्रेड का प्रतिशत लगातार बढ़ा है।
विद्यार्थी विरोध और संकाय मतभेद
यह फैसला छात्रों के व्यापक विरोध और शिक्षकों के मिश्रित विचारों के बाद आया है। कई छात्रों को चिंता है कि नई नीति उनके अकादमिक दबाव को बढ़ा सकती है। वहीं, कुछ शिक्षक मानते हैं कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
2027 तक की देरी का मतलब है कि विश्वविद्यालय के पास इस नीति पर और चर्चा करने और इसे परिष्कृत करने का समय है। दुनिया भर के शीर्ष संस्थान हार्वर्ड के इस प्रयोग पर नजर रखेंगे, क्योंकि इसके नतीजे उच्च शिक्षा में मूल्यांकन प्रणालियों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
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